BJP के चुनावी बस्तों पर भेजा गया आधा पैसा डकार गए बिचौलिए

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डॉ.राकेश द्विवेदी 

उरई। भाजपा के भीतर ही भीतर इस वक्त उथल -पुथल है। ऐसा होने के पीछे एक बड़ा कारण सामने आया है। चुनावी बस्तों को संभालने के लिये चाय – नाश्ता इत्यादि के लिये जो धनराशि पार्टी की ओर से भेजी जाती है ,वह कई स्थानों पर या तो पहुँची नहीं या फिर उसकी धनराशि आधी रह गई।जहाँ पर ऐसा हुआ है उसकी जांच करने में पार्टी जुट गई है। पूरी धनराशि दिलवाने के प्रयास भी शुरू हो गये हैं।

ईमानदारी की छवि के साथ राजनीति में आगे बढ़ने की कोशिश में लगी भाजपा के दामन पर कथित तौर पर बेईमानी के दाग लग रहे हैं। सभी दलों की यह नीति है कि मतदान केन्द्रों पर लगने वाले बस्तों के लिये कुछ नगदी भी दी जाती है,जिससे चाय- नाश्ता के साथ कुछ आवश्यक जरूरतें उससे पूरी की जा सकें। बस्तों की यह धनराशि महंगाई के साथ इसमें बढ़ोत्तरी हो रही है। भाजपा में इस बार प्रति बस्ता 1000रुपये रखने का प्रावधान था। मतदान केंद्र के हिसाब से वह नाम तय किये गये थे,जिसको बस्ता सौपा जाना था। पार्टी सूत्रों के अनुसार कदौरा क्षेत्र में ज्यादातर बस्ते खुले पाये गये। यह कैसे खुले ? कोई नहीं बता सका।

पार्टी के कुछ जिम्मेदार लोगों ने मतदान की जानकारी के बाद जब धनराशि के बारे में जानकारी ली तो चौकाने वाली जानकारी सामने आने लगी। बताया गया कि उनके पास 1000 नहीं 500 रुपये ही आये हैं। बताया जाता है कि कई स्थान ऐसे भी रहे हैं ,जहाँ 500 भी नहीं मिले। इसको लेकर असन्तोष भी उभरा।जिले के कई हिस्सों में धनराशि कम पहुंचाये जाने की शिकायत सामने आई है।पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि जिसके द्वारा ऐसा किया गया है,वह पार्टी की छावि को धूमिल करना चाहते हैं। सूत्रों के अनुसार पैसे कम मिलने का मामला पार्टी के जिलाध्यक्ष तक भी पहुंचा है।इस सम्बन्ध में जब नागेन्द्र गुप्ता से उनका पक्ष जाना गया तो उन्होने कहा कि सभी जगह तो नहीं पर कुछ जगह से ऐसी जानकारी उन्हें मिली थी कि वहाँ पैसा पूरा नहीं पहुंचा है। मैं तुरंत कदम उठाकर उन्हें पैसा दिलवा दिया। पार्टी सूत्रों के अनुसार बस्तों को सम्भालने वाले तक पैसा पहुंचाने की जिम्मेदारी वहाँ के मंडल अध्यक्षों को दी गई थी। अब यह पैसा किस तरह से आधा रह गया , इसकी तह तक पहुँचने की कोशिश में लग गई है। जहाँ-जहाँ से इस तरह के कदाचार की शिकायतें उभरी हैं ,उस ओर ध्यान केंद्रित किया गया है।

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