धृतराष्ट्र और दुर्योधन का किरदार निभाने की परंपरा कांग्रेस के चरित्र में: पाण्डेय

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लखनऊ , भारतीय जनता पार्टी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि जिस कांग्रेस पार्टी में एक ही परिवार विशेष के वंशजों के अलावा किसी और को बोलने तक का अधिकार न हो, उस कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी कौरव-पांडव का उदाहरण देते हैं और जनता की आवाज बनने की बात करते है तो स्वयं ही हंसी के पात्र बनते हैं। यदि राहुल गांधी धर्मगं्रथों को स्वयं पढ़े होते तो ऐसी हास्यास्पद बात बोलने की उनकी हिम्मत नहीं होती।
उन्होंने कहा कि धृतराष्ट्र और दुर्योधन का किरदार निभाने की परंपरा कांग्रेस के चरित्र में है। सरदार पटेल से लेकर नरसिंहराव जैसे कितने कांग्रेस के नेता हैं, जिनका कांग्रेस के आंतरिक लोकतंत्र में विरोधी साजिश का शिकार हुए। नेहरू-गांधी परिवार के लोग कांग्रेस को तो अपनी फेमिली एंड कंपनी की निजी संपत्ति समझे ही, वे जनता को अपनी कंपनी का गुलाम समझते हुए देश को भी अपनी जागीर समझते हैं।
जिस सोनिया जी और राहुल जी के परिवार ने सत्ता के लिए अपने परिवार के लोगों का ही हक छीना और उनसे अछूत की तरह बर्ताव किया, वो जनता के प्रति कितने संवेदनशील हो सकते हैं, यह जनता अच्छी तरह जानती है। उन्होंने कहा कि धृतराष्ट्र और दुर्योधन का चरित्र समझना हो तो सोनिया व राहुल को अपने ही घर की बहू और उसके बेटे के साथ किए गए अन्याय को देखना चाहिए। फिर समझ में आ जाएगा कि पांडव कौन है और कौरव कौन।
डॉ. पांडेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह लोकतंत्र को अगवा करके किसी परिवार विशेष के लिए काम नहीं करते हैं। प्रधानमंत्री अंत्योदय के संकल्प पर गरीबों, दलितों, पिछड़ों, युवाओं और महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य कर रहे हैं और अमित शाह देश में लोकतंत्र को मजबूत करने वाले संगठन के माध्यम से लिए जनता को आर्थिक, राजनैतिक व सामाजिक अधिकार दिलाने के लिए कार्य कर रहे हैं। अब भ्रष्टाचार, लूट व भाई-भतीजावाद से सत्ता पर कब्जा करने में सफल रही कांग्रेस की सोनिया व युवराज राहुल को यह बर्दाश्त नहीं हो रहा है कि कैसे देश की आम जनता में से निकला एक गरीब परिवार का व्यक्ति नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गया और कैसे एक साधारण सा व्यक्ति अमित शाह भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष पद तक पहुंच गया।
डॉ. पांडेय ने कहा कि धृतराष्ट्र ने दुर्योधन के पुत्र मोह में महाभारत करा डाली, लेकिन सत्य व न्याय को स्वीकार नहीं कर सका। ऐसे ही कांग्रेस में भी संतान मोह की खातिर वंशवादी राजनीति के जरिए देश की सत्ता और कांग्रेस पर कब्जा करने का इतिहास आज तक जारी है। इसलिए राहुल गांधी को अपने गिरेबान में झांककर अपने परिवार के लोकतंत्र विरोधी वंशवादी इतिहास को देखना चाहिए।

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