विधानसभा अध्यक्ष के चयन पर भाजपा ने तोड दी संसदीय परंपरा: शोभा ओझा

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बुन्देलखण्ड खबर-
भोपाल। मध्य प्रदेश कॉंग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग की अध्यक्ष श्रीमती शोभा ओझा ने भारतीय जनता पार्टी पर मध्यप्रदेश की गौरवशाली संसदीय परंपरा का निर्वहन नहीं करने का आरोप लगाया है श्रीमती शोभा ओझा ने कहा कि मध्य प्रदेश की संसदीय परंपरा और गरिमा को पूरे देश मे सदैव प्रतिष्ठा मिली है ।सत्ता पक्ष और विपक्ष के बेहतर तालमेल से मध्यप्रदेश की संसदीय परंपरा का सदैव निर्वहन होता आया है ।भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष के निर्वाचन में वर्षों से चली आ रही गौरवशाली संसदीय परंपरा को इस बार धूमिल कर दिया है।

 

भाजपा का यह कृत्य उसके निम्न स्तरीय संसदीय आचरण और सत्ता की लालसा से जुड़े कृत्य को प्रदर्शित करता है। भाजपा एक और तो अपने आप को संसदीय परंपरा का पक्षधर बताती है दूसरी ओर इसी परंपरा के निर्वहन से परहेज करती है श्रीमती ओझा ने कहा कि अच्छा होता यदि भारतीय जनता पार्टी सर्वसम्मति से विधानसभा अध्यक्ष के चयन में सत्ता पक्ष का सहयोग करती न कि चुनाव की नौबत आने देती ।अभी तक मध्य प्रदेश के इतिहास में मात्र दो बार वर्ष 1967 एवं 1972 में विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव की स्थिति निर्मित हुई है ।बाद के वर्षों में भाजपा के शासनकाल में भी कांग्रेस ने सर्वसम्मति से विधानसभा अध्यक्ष के चयन का निर्णय होने दिया ।

 

shobhaश्रीमती ओझा ने कहा कि यदि भारतीय जनता पार्टी चुनाव का विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव को लेकर अपनी हठधर्मिता पर कायम रही तो कांग्रेस भी विधानसभा उपाध्यक्ष के पद के लिए चुनाव करवाने पर विवश होगी । यह स्पष्ट है कि कांग्रेस के पास बहुमत है और विधानसभा अध्यक्ष के साथ ही उपाध्यक्ष का पद भी कांग्रेस को ही मिलना तय है ।भारतीय जनता पार्टी क्योंकि सत्ता में नहीं है उसे पद पद की लालसा अभी भी कायम है इसलिए वह विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव करवा कर उसे प्राप्त करने की बेकार कोशिश कर रही है । श्रीमती ओझा ने कहा है कि कॉंग्रेस विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है । विधानसभा चुनाव में एक बार हार चुकी भाजपा की अब 8 जनवरी को विधानसभा अध्यक्ष पद के चुनाव में दूसरी बड़ी हार होगी ।

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