सावधान: चल रहा हे डेंगू माह, अच्छी बात; 4 सालों में नहीं मिला कोई भी चिकनगुनिया को रागी

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स्वास्थ्य विभाग का दावा पिछले चार सालों में नहीं मिला चिकनगुनिया व फ़ाईलेरिया का एक भी रोगी। डेंगू के मुक़ाबले मलेरिया हो रहा है अधिक हावी।

ललितपुर.  बारिश के मौसम में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियाँ अपना पाँव पसारने लगती है जिसमे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया व फ़ाईलेरिया जैसी बीमारियाँ तेजी से फैलने की संभावना बढ़ जाती है। ये बीमारियाँ फैलाने वाले मच्छर इसी मौसम में सबसे ज्यादा पनपते है। प्रत्येक साल जुलाई माह डेंगू माह जागरूकता के रूप में मनाया जाता है। इस माह ज्यादा से ज्यादा संख्या में डेंगू के लिए जागरूक किया जाता है।

स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि पिछले कुछ सालों में जनपद में चिकनगुनिया एवं फ़ाईलेरिया का एक भी रोगी नहीं देखा गया। वहीं इन बीमारियों से निपटने के लिए जनपद में जुलाई के दूसरे सप्ताह में रैपिड रिस्पोंस टीम का गठन किया गया, जिसके तहत नगरीय एवं ब्लॉक स्तर पर तहत डेंगू, मलेरिया एवं अन्य के मरीजों की जल्द से जल्द पहचान कर उनको बेहतर उपचार देना है।

स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार जनपद में 2014 से लेकर जून 2018 तक के मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया और फाइलेरिया के तुलनात्मक आंकड़े इस प्रकार है।

वर्ष मलेरिया डेंगू चिकनगुनिया
रोगी मृत्यु रोगी मृत्यु रोगी मृत्यु
2014 333 0 0 0 0 0
2015 253 0 0 0 0 0
2016 214 0 12 0 0 0
2017 288 0 4 0 0 0
जून 2018 तक 58 0 0 0 0 0

 

डॉ. के एस यादव, जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि जनपद में चिकनगुनिया और फ़ाईलेरिया कभी भी इतना प्रभावी नहीं रहा है। चिकनगुनिया और फाईलेरिया के रोगी अक्सर कहीं दूसरे स्थान से आते है और वहीं इनके द्वारा कभी कभार फैलने का कारण बन जाते है। खास बात यह है कि पिछले पाँच सालों में जनपद में चिकनगुनिया और फ़ाईलेरिया के एक भी मामले सामने नहीं आए है। वहीं फाइलेरिया भी जनपद में पूरी तरीके से समाप्त हो चुका है। उन्होने बताया कि पिछले कुछ सालों में फ़ाईलेरिया के एक भी नए रोगी पाये गए।

उन्होने बताया कि बारिश का मौसम आते ही डेंगू, मलेरिया, आदि बीमारियों बढ़ने लगती है और जहां पानी जमा होने लगता है वहाँ मच्छर भी पनपने लगते है। इसीलिए मच्छरों को शुरुआती स्टेज में खत्म करने पर सबसे अधिक ज़ोर दिया जाता है जिससे वो पनपने ही न पाएँ। इसके लिए लार्वीसाईड स्प्रे का छिड़काव किया जाता है जिससे मच्छरों के लार्वा शुरुआती चरण में ही नष्ट हो जाते है।

उन्होने बताया कि डेंगू मलेरिया आदि फैलाने वाले मच्छर अगस्त से नवंबर तक प्रभावी रहते है क्योंकि यह समय इन मच्छरों के लिय सबसे अनूकूल होता है। डेंगू और चिकनगुनिया का एडीज मच्छर दिन में काटता है वहीं मलेरिया का एनोफिलीज़ मच्छर रात में और फ़ाईलेरिया का क्यूलेक्स बिसनोई मच्छर दिन में काटता है लेकिन उसका असर तब ज्यादा फैलता है जब व्यक्ति शांत अवस्था में बैठा हो।

रोग लक्षण
मलेरिया ·         सर्दी के साथ एक दिन छोडकर बुखार आना

·         उल्टी, सिरदर्द, बुखार उतारने के बाद पसीना निकलना

·         कमजोरी आना

डेंगू ·         तीज बुखार, सिरदर्द, बदन व जोड़ों में दर्द, शरीर पर लाल दाने

·         खून की उल्टी

·         पेशाब व माल में खून आना

चिकनगुनिया

 

 

·         तेज बुखार, मांस पेशियों, कमर व जोड़ों में बहुत तेज दर्द व सूजन आना

·         शरीर पर लाल दानें व चकत्ते पड़ जाना

फ़ाईलेरिया

 

 

·         जाड़ा लगकर बुखार आना

·         हाथ पैर, अंडकोष, स्तन आदि अंगों में सूजन आना एवं दर्द होना

 

रैपिड रिस्पोंस टीम का गठन

राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जनपद में पाँच सदस्यीय रैपिड रिस्पोंस टीम का गठन किया गया जिसका उद्देश्य जल्द से जल्द मलेरिया, डेंगू आदि बीमारियों की निगरानी व पहचान कर उनका निदान करना है। जनपद में इस तरह की इकाई होने से धीरे-धीरे मरीजों की संख्या कम होगी। इस टीम में जिला सर्विलान्स अधिकारी, जिला मलेरिया अधिकारी, वरिष्ठ फिजीशियन, बाल रोग विशेषज्ञ एवं पैथोलोजिस्ट को शामिल किया गया है। वहीं ब्लॉक स्तर पर चिकित्साधीक्षक, फार्मासिस्ट, एएनएम और वार्डब्योय को शामिल किया गया है। इसके अलावा टीम में जिला एवं ब्लॉक स्तर पर लैब टेकनीशियन को भी शामिल किया गया, जो जांच प्रक्रिया में गतिशीलता प्रदान कराता है। इस टीम का कार्य यह है कि जहां भी वेक्टर ग्रसित रोगी पाया जाता है टीम वहाँ पहुँचकर उनकी जल्द से जल्द से पहचान कर उनका उपचार करती है। इसके अलावा नगर व ब्लॉक में हो निरंतर हो रहे लार्वीसाईड छिड़काव की जांच करना भी इस टीम का कार्य है।

वेक्टर जनित रोगों से बचाव के बारे में जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि सभी मच्छर रुके हुये और साफ पानी में अंडे देते है इसलिए रुके हुये पानी के स्थान को भर दें या कुछ बुँदे मिट्टी के तेल की डाल देनी चाहिए। घर में भरे हुये कूलर को सप्ताह में एक बार अवश्य साफ करें। डेंगू चिकनगुनिया का मच्छर दिन में काटता है तो पूरी आस्तीन के कपड़े व मोजे अवश्य पहने। घर और छतों पर पड़े अनावश्यक पत्रों को हटा दें और सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। वहीं बुखार आने पर पैरासिटामोल दवा खाएं एवं अस्पताल में पूर्ण जांच कराकर उपचार कराएं।

 

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