बुंदेलखंड के इस ADM के सिफारिशी फोन पर नाराज हुए जज, अब न्यायलय की अवमानना में जा सकते हैं जेल

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बांदा। नौ वर्ष पुराने मामले में न्यायालय में पेश होने पर उप जिलाधिकारी एटा को डकैती कोर्ट के तत्कालीन विशेष न्यायाधीश हरिनाथ पांडेय ने न्यायिक हिरासत में जेल भेजने की कार्रवाई कर दी थी। इस पर एडीएम ने न्यायाधीश को फोन करके एसडीएम को जेल न भेजने की बात कही थी। इस मामले पर न्यायालय ने एडीएम से व्यक्तिगत तौर पर न्यायालय में पेश होकर स्पष्टीकरण देने की बात कही थी। एडीएम ने स्पष्टीकरण दिया और माफी मांगी। अलबत्ता न्यायालय ने माफी न देते हुए एडीएम के खिलाफ न्यायालय की अवमानना की धारा 2(सी) के तहत मुकदमा दर्ज करने के साथ ही हाईकोर्ट इलाहाबाद को पत्र लिखकर अवगत कराया है। प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश, प्रमुख सचिव प्रशासनिक और शासन के व्यक्तिगत विभाग को एडीएम के खिलाफ कार्रवाई के लिए भी पत्र लिखा है।
नौ वर्ष पुराने डकैती के मामले में एटा जिले के एसडीएम नत्थू प्रसाद पांडेय न्यायालय में उपस्थित नहीं हो रहे थे। उनके खिलाफ लगातार गैरजमानती वारंट जारी किए गए थे। बमुश्किल एसडीएम डकैती कोर्ट के तत्कालीन विशेष न्यायाधीश हरिनाथ पांडेय की अदालत में पेश हुए थे और अंतरिम जमानत अरजी पेश की थी। न्यायालय ने जमानत अरजी खारिज करते हुए एसडीएम को जेल भेज दिया था। हिरासत में होने के बावजूद एसडीएम ने एडीएम से फोन करके सिफारिश की बात कही थी।
इस पर जनपद मुख्यालय के अपर जिलाधिकारी गंगाराम गुप्त ने अपने सीयूजी मोबाइल नंबर से न्यायाधीश हरिनाथ पांडेय के मोबाइल पर फोन करते हुए कहा था कि एसडीएम को जेल क्यों भेज रहे हैं, उन्हें छोड़ दिया जाए। न्यायाधीश ने जब इंकार किया तो अपर जिलाधिकारी ने कहा कि एसडीएम को जेल कैसे भेज सकते हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायाधीश ने न्यायिक कार्य में बाधा डालने का दांडिक अपराध मानते हुए अपर जिलाधिकारी को नोटिस जारी किया था। 22 मार्च को एडीएम न्यायालय में पेश हुए और स्पष्टीकरण न्यायाधीश के समक्ष देते हुए माफी मांगी थी, लेकिन न्यायालय ने माफी नहीं दी। इस मामले में डकैती कोर्ट के वर्तमान विशेष न्यायाधीश नरेंद्र कुमार झा ने 6 अप्रैल को अपर जिलाधिकारी गंगाराम गुप्त के खिलाफ न्यायालय की अवमानना की धारा 2 (सी) के तहत मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। इसके साथ ही न्यायाधीश ने हाईकोर्ट इलाहाबाद को भी पत्र लिखकर अवगत कराया है। इतना ही नहीं न्यायाधीश ने प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश शासन, प्रमुख सचिव प्रशासनिक के अलावा व्यक्तिगत विभाग उत्तर प्रदेश शासन को एडीएम के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है।

तहसीलदार पर भी लटकी तलवार

वर्ष 2008 के जिस मामले में एटा उप जिलाधिकारी को न्यायिक हिरासत में जेल जाना पड़ा और मुख्यालय के अपर जिलाधिकारी गंगाराम गुप्त को न्यायालय की कार्रवाई की फेहरिस्त में आना पड़ा, इस मामले में अब नौ वर्ष पहले बबेरू में नायब तहसीलदार के तौर पर कार्यरत रहे योगेंद्र कुमार साहू के खिलाफ भी गैरजमानती वारंट न्यायालय ने जारी किया है। उप जिलाधिकारी एटा की तरह नायब तहसीलदार भी न्यायालय में पेश नहीं हो रहे हैं।

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