28 फीसदी बच्चों की मौतें इस बीमारी से होती है: एडिशनल डायरेक्टर

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@राम नरेश यादव

झांसी. डायरिया और निमोनिया से होने वाली मौतों को रोकने के लिए आज जनपद के चार ब्लॉकों के ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर, ब्लॉक कम्यूनिटी प्रोसैस मैनेजर, फर्मिसिस्ट, मेडिकल ऑफिसर की एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन अपर निदेशक डॉ॰ सुमन बाबू मिश्रा की अध्यक्षता में की गई। जहां उन्हें डायरिया और निमोनिया के कारण, पहचान और निवारण की बारीकियों की जानकारी दी गई। बाकी के चार ब्लॉक के लिए कार्यशाला आगामी 26 जुलाई को की जाएगी।

अध्यक्षता कर रहे अपर निदेशक डॉ॰ सुमन बाबू मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में निमोनिया से लगभग 58000 बच्चों की मृत्यु हो जाती हैं वही डायरिया की वजह से लगभग 37000 बच्चे असामयिक मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। उनके अनुसार कुल शिशु मृत्यु में लगभग 28 प्रतिशत मौतें इन्ही दो कारणों की वजह से होती हैं। “विकासशील देश में इन कारणों से बच्चों की मृत्यु होना बड़ी शर्म की बात हैं। यह वह कारण हैं जिनको थोड़ी सी सावधानियाँ बरतने पर दूर किया जा सकता हैं,’’ उन्होने कहा।

वही 28 जुलाई से शुरू हो रहे सघन दस्त पखवाड़े के लिए भी उन्होने आवाहन किया कि इस पखवाड़े को सबको मिलकर सफल बनाना हैं।

कार्यशाला का संचालन डॉ॰ विजयश्री, स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी के द्वारा किया गया। जिसमें सर्वप्रथम डॉ॰ राहुल गुप्ता के द्वारा प्रेजेंटेशन के माध्यम से डायरिया और निमोनिया के बारें में जानकारी दी गई। उन्होने बताया कि डायरिया में अक्सर यह देखा जाता हैं कि जब बच्चे की हालत सुधर गई तो लोग दवाई बंद कर देते हैं। जबकि डायरिया में 14 दिन का कोर्स जरूर करना चाहिए, जिसमें 2 से 6 माह तक के बच्चे को 14 दिन तक ज़िंक की आधी गोली वही 6 माह से ऊपर के बच्चे को 14 दिन तक जिंक की पूरी गोली देनी चाहिए।

कार्यशाला को संबोधित करते हुये मुख्यचिकित्सा अधिकारी डॉ॰ सुशील प्रकाश ने ट्रेनिंग ले रहे सभी सदस्यों को निर्देश दिया कि यह ट्रेनिंग सिर्फ यही तक सीमित न रह जाए, बल्कि  सब अपने अपने क्षेत्र में जाकर आशा और एएनएम को भी इसके बारें में बताए जिसके वह बच्चों को चिन्हित करके ला सके।

इस कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, सिफ़प्सा और यूनिसेफ़ के सहयोग से कराया गया। इस कार्यशाला में संयुक्त निदेशक डॉ॰ रेखरानी, अपर मुख्यचिकित्सा अधिकारी डॉ॰ एनके जैन, सिफ़प्सा के मण्डल कार्यक्रम प्रबन्धक आनंद चौबे, यूनिसेफ़ के डॉ॰ पालीवाल आदि लोग मौजूद रहे।

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