पत्नी ने पैर पकड़े फिर भी नहीं पसीजा डॉक्टर्स का दिल, 3 घंटे अस्पताल के गेट पर तड़पता रहा बुजुर्ग

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हमीरपुर. 70 साल का एक बुजुर्ग सरकारी अस्पताल की चौखट पर इलाज के लिए छटपटाता रहा, लेकिन इंसानी भगवान् का दिल नहीं पसीजा. पूरे तीन घंटे तक वृद्ध और उसके परिजन अस्पताल के बाहर ही तड़फ रहे मरीज को जल्द उपचार कराने की सांत्वना देते रहे. पत्नी डॉक्टर्स के पैर पकड़ कर अपने पति का उपचार करने के लिए फ़रियाद करती रही. वहां के चिकित्सक तैयार नहीं हुए. तीन घंटे बाद जब बुजुर्ग की हालत काफी बिगड़ गई तब लोगों की भीड़ बढ़ने पर उसका उपचार शुरू किया गया. योगी राज में इस शर्मनाक तस्वीर ने भाजपा सरकार की छवि को और नीचे गिरा दिया है.
 यह है पूरा मामला-
हमीरपुर जिले के कुरारा क्षेत्र के डामर गांव में हरिनारायण (70) की
हालत तेज बुखार से गंभीर हो गयी। परिजनों ने एम्बुलेंस को फोन किया। फोन के बाद एम्बुलेंस मौके पर नहीं पहुंची तब परिजनों ने किराये का वाहन
(लोडर) कर बुजुर्ग को इलाज के लिये हास्पिटल लेकर आये। बताते है कि हास्पिटल की चौखट पर यह बुजुर्ग तीन घंटे तक वाहन में
तड़पता रहा मगर परिजनों के गिड़गिड़ाने के बाद डाक्टर ने आये।
और तो और बुजुर्ग की पत्नी रानी और नाती राहुल डाक्टरों के पास जाकर कई
बार हाथ जोड़कर विनती की मरीज को भर्ती कर लो।
लेकिन डाक्टरों का दिल नहीं पसीजा। हास्पिटल प्रशासन की अंधेरगर्दी भी
देखिये कि बुजुर्ग को स्ट्रेचर तक भी मुहैया नही कराया गया।
लोगों के भड़कने पर दबाव में आये चिकित्सकों ने शुरू किया इलाज –
भाजपा के कुछ लोगों ने जब हास्पिटल में डाक्टरों की कार्यप्रणाली पर
नाराजगी जताई तब कही जाकर बुजुर्ग को भर्ती किया जा सका।
-बीमार बुजुर्ग के नाती राहुल का कहना है कि योगी सरकार की मंशा बहुत ही
साफ है लेकिन यहां के डाक्टरों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़। -उसका कहना
है कि कई बार डाक्टर साहब के पास गये लेकिन मरीज को भर्ती नहीं किया।
जिससे मेरे नाना 3 घंटे तक लोडर में पड़े रहे।
क्या कहती है बुजुर्ग की पत्नी-
बुजुर्ग मरीज की पत्नी रानी देवी का कहना है कि फोन करने के बाद बीमार
पति को अस्पताल लाने के लिये 108 एम्बुलेंस नहीं आयी। किराये का लोडर कर पति को अस्पताल लाया गया तो घंटों विनती करने के बाद
भी डाक्टरों ने भर्ती नहीं किया। लोडर में पति कराहते रहे।
 सीएमएस ने दी सफाई –
जिला पुरुष अस्पताल के सीएमएस डा.आरके शर्मा ने बताया कि इस मरीज को
खतनाक टीबी है जिसे डा.पीके गुप्ता ने कानपुर रेेफर किया था। लेकिन परिजन मरीज को कानपुर नही ले गये। मजबूरी में दोपहर बाद उसे वार्ड
में भर्ती किया गया क्योंकि टीबी वार्ड उनके यहां नही है।

 

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