सूखा और कर्ज से लड़ा, बीमार बेटी के दर्द से हार गया किसान, कर ली आत्महत्या, अब परिवार के सामने इलाज की चुनौती

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मृतक किसान की माँ के साथ पत्नी और बच्चे,

@अजय झा

झांसी। 38 वर्षीय किसान विक्रम बुन्देलखण्ड में पड़ रहे लगातार सूखे से लड़ा। फसल सूखने के बाद बढ़ते कर्ज के बोझ से भी लड़ता रहा, लेकिन दिल की बीमारी से पीडि़त अपनी 10 साल की बेटी के दर्द के आगे हार गया। इलाज में काफी पैसा खर्च होने के बाद भी वह ठीक नहीं हुई। ऑपरेशन के लिए काफी पैसे की दरकार थी। इसी चिंता में टूट गया। और बीते सप्ताह उसने रेलवे लाइन पर जाकर खुदकुशी करली। अब उसकी विधवा हो चुकी पत्नी के ऊपर परिवार चलाने के साथ बेटी के इलाज की भी जिम्मेदारी है। पति की मौत के बाद बेटी को बचाने की चिंता में वह अपना मानसिक संतुलन खोने लगी है।


झांसी जिले के ब्लाक बबीना स्थित ग्राम खजुराहा बुजुर्ग के मजरा पथरवाहा निवासी 38 वर्षीय किसान विक्रम अहिरवार लगातार सूखे की मार से परेशान था। विक्रम अपनी डेढ़ एकड़ जमीन पर खेती कर ही परिवार का खर्ज उठाता था। लगातार सूखा पडऩे से फसल खराब होती रही। इस बार उसने उर्द के बाद गेहूं की फसल बोई जो पानी के अभाव में सूख गई। विक्रम पर जिला सहकारी बैंक का डेढ़ लाख रुपए का कर्ज चढ़ गया था। फसल नुकसान के साथ किसान विक्रम की 10 साल की बेटी बीमार हो गई। डाक्टरों ने बताया कि उसके दिल में सुराख है। बेटी को बचाने की कोशिश में विक्रम ने साहूकारों से भी कर्ज ले लिया। कई अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद भी बेटी स्वस्थ नहीं हुई। इसके ऑपरेशन के लिए जो पैसा डाक्टरों ने मांगा वह गरीब किसान की क्षमता से बाहर था। अब एक तरफ तबाह फसल के साथ चढ़ते कर्ज की चिंता थी। दूसरी तरफ बेटी की जिंदगी। इसी दर्ज में विक्रम टूट गया। जैसे उसके लिए मदद की सभी उम्मीदें खत्म हो चुकीं थीं। बेटी जिंदगी बचाने के सभी रास्ते बंद होते दिखे तो उसने खुद की मौत का रास्ता चुन लिया। 18 दिसम्बर की रात पत्नी और बच्चों को घर में सुलाकर रेलवे लाइन पर पहुंच गया। वहां ट्रेन के आगे लेटकर उसने खुदकुशी कर ली।

अब पत्नी पर है बेटी के इलाज के साथ परिवार पालने की जिम्मेदारी
पति की मौत के बाद 35 साल की महिला किसान राजकुमारी सदमे में है। उसके ऊपर पति की बूढ़ी मां रामकली व दो बच्चों की जिम्मेदारी है। उसक एक बेटी दीक्षा के दिल में छेद है। दीक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल में कक्षा 4 में पढ़ती है वहीं 12 साल का बेटा पंजाब पांचवीं कक्षा में है।
बेटी के इलाज के लिए मां ने मांगी मदद
पति की मौत से दुखी राजकुमारी कहती है, पैले सें घर में कछु खाबे के लाने नईं हतौ। अब जिंदगी कटबौ तौ मुश्किलई है। हमाई मौड़ी बीमार है। कोई ऊकौ इलाजई करा देवे तौ बड़ी कृपा हो जाय।

परमार्थ समाजसेवी संस्था ने की लोगों से मदद की अपील
परमार्थ समाजसेवी संस्था के प्रमुख संजय सिंह ने इस किसान परिवार की पीड़ा को अपने फेसबुक पेज पर शेयर किया है। उन्होंने किसान की आत्महत्या के बाद दिल की बीमारी से लड़ रही उसकी बेटी की मदद करने की अपील की। संजय सिंह कहते हैं, परमार्थ संस्था उसे हरसंभव मदद करने को तैयार है। लोग भी उसके उपचार के लिए खुलकर मदद करें। दीक्षा की जिंदगी बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।
पत्नी के बैंक खाते में पैसा भेजकर कर सकते हैं मदद
परमार्थ संस्था के लिए कार्य करने वाले राजेश कहते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति काफी खराब है। यदि उसकी मदद नहीं की गई तो विक्रम के बाद दीक्षा की जिंदगी भी बचाना मुश्किल होगी।
दीक्षा के इलाज के लिए यदि कोई मदद करना चाहता है तो वह दीक्षा की मां राजकुमारी के पंजाब नेशनल बैंक खैलार झांसी के खाते में पैसा भेज सकता है। बैंक शाखा का आईएफएस कोड- पीयूएनबी0232500 तथा खाता संख्या 2325001700088895 है।

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