बुंदेलखंड : बीना परियोजना के खिलाफ 72 गाँव के किसान करेंगे महापंचायत, होगा चुनाव का बहिष्कार

0
बीना परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन करते किसान

@बुंदेलखंड खबर

सागर । बीना परियोजना के खिलाफ किसानों ने बिगुल फूंक दिया है. किसानों ने कहा कि वह अपनी जमीन को इस योजना की भेंट नहीं चढ़ने देंगे. सरकार को यदि उनकी जमीन का अधिग्रहण करना है तो वह जमीन के बदले जमीन उपलब्ध करा दे.
इसी को लेकर प्रभावित किसान संघर्ष समिति ने  अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय पर बीना परियोजना रदद् करने की मांग को लेकर किसानों द्वारा प्रदर्शन किया गया । बेगमगंज क्षेत्र के 41 गाँव की समितियों के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के साथ साथ सागर के 21 गाँव में किसान संघर्ष समितियों का नेतृत्व कर रहे किसान नेताओं ने बड़ी संख्या में भागीदारी की। सभा के बाद एसडीम कार्यालय पहुंच कर डॉ. सुनीलम के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया ।
      प्रदर्शन से पूर्व  स्वागत लाज बस स्टैंड पर आयोजित किसान सभा में विभिन्न गाँव से आये किसानों ने बताया कि उन्हें आज तक शासन की ओर से परियोजना की कोई जानकारी नहीं दी गई है । प्रभावित किसानों ने आक्रोशित होते हुए परियोजना की जानकारी न देने के लिए तथा जमीन बचाने के लिए चलाये जा रहे आन्दोलन का समर्थन नहीं करने के लिए जनप्रतिनिधियों पर निशाना साधा । किसान वक्ताओं ने कहा कि चुनाव नजदीक आ गया है इसके वावजूद पार्टियों के नेता हमसे बात करने को तैयार नहीं हैं जिससे लगता है कि उन्हें हमारे वोट की जरूरत नहीं है।
     वक्ताओं ने चुनाव के वहिष्कार का संकेत देते हुए कहा कि चुनाव की घोषणा होने के बाद बीना परियोजना प्रभावित किसानों की विशाल महापंचायत बुलाई जाएगी जिसमें 72 गाँव के किसानों द्वारा चुनावों को लेकर एक साथ फैसला किया जायेगा ।
डॉ. सुनीलम ने कहा कि देश में निष्पक्ष मुआवजा एवं भूमि अधिग्रहण , पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना में पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 भू अर्जन का जो कानून प्रभावी है उसमें सहमति लेना, सामाजिक एवं पर्यावर्णीय प्रभाव हेतु जनसुनवाई करना आवश्यक है, इस कानून में बहु फसली भूमि के अधिग्रहण पर रोक है तथा विस्थापित परिवारों के एक सदस्य को नौकरी दिए जाने का प्रावधान है । लेकिन मध्यप्रदेश शासन इन प्रावधानों का पालन करने को तैयार नहीं है ।
बीना परियोजना के सम्बन्ध में जल संसाधन विभाग हेतु ईआईए अध्ययन रिपोर्ट का हवाला देते हुये डॉ.सुनीलम ने बताया कि वाप्कोस लिमिटेड कम्पनी द्वारा मार्च 2016 में जारी रिपोर्ट में बताया गया है। बीना परियोजना हेतु 34885 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जायेगा तथा अधिग्रहण पर 2748 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे ।
जिससे पता चलता है की सरकार की मंशा प्रति एकड़ 78 हजार रूपये देने की है । जबकि डूब क्षेत्र में कहीं पर भी सिंचित जमीन न तो खरीदने के लिए उपलब्ध है । यदि है भी तो 10 लाख रूपये एकड़ से कम पर उपलब्ध नहीं है।  अर्थात सरकार जो मुआवजा राशि देना चाहती है उससे 10 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के बाद प्रभावित किसान एक एकड़ जमीन भी नहीं खरीद सकेगा ।
किसानों को संवोधित करते हुए डॉ. सुनीलम ने कहा की नर्मदा बचाओ आन्दोलन –जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय द्वारा नर्मदा घटी में संघर्ष के साथ साथ मुकदमा लड़ कर सर्वोच्च न्यायालय से किसानों को 60 लाख रूपये हक्टेयर की दर से मुआवजा दिलाया गया है । आन्दोलन के परिणाम स्वरूप राज्य सरकार को सरदार सरोवर बांध प्रभावित किसानों को 950 करोड़ रूपये का अतिरिक्त पैकेज देने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
डॉ.सुनीलम ने कहा कि प्रदेश में डूब प्रभावितों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता जो मुआवजा राशि नर्मदा घाटी में दी गई है तथा किसी भी किसान की 25 प्रतिशत से अधिक भूमि अधिग्रहित किये जाने पर उसे दो एकड़ जमीन देने के साथ साथ परिवार के सभी बालिग सदस्यों को भी दो दो एकड़ भूमि प्रदान की गई है । यही नीति बीना बांध प्रभावितों पर भी लागू होना चाहिए । डॉ. सुनीलम ने कहा कि कांग्रेस पार्टी भी अपना रुख स्पष्ट करे कि वह बीना परियोजना के पक्ष में है या विरोध में ।
    केबिनेट मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक रामपाल सिंह पर हमला बोलते  हुए डॉ.सुनीलम ने कहा कि जिन मतदाताओं ने उन्हें 5 बार विजयी बनाया जिसके चलते उन्हें मंत्री पद का सम्मान प्राप्त हुआ, उनकी जमीन छीनने के पहले तथा  डुबाने का फैसला लेने के बारे में जरा भी विचार नहीं किया ।
डॉ.सुनीलम ने कहा कि मंत्री महोदय यदि अपने क्षेत्र और किसानों के हितैषी होते तो वे परियोजना के केबिनेट में पारित होने के समय मंत्री पद और पार्टी से स्तीफा देने की पेशकश कर देते जिससे किसानों को आसानी बर्बाद होने से बचाया जा सकता था। साथ ही  35 हजार एकड़ कृषि भूमि तथा 2600 एकड़ वन भूमि को बचाया जा सकता था ।
  बीना परियोजना प्रभावित किसान संघर्ष समिति राहतगढ़ के अध्यक्ष कुबेरसिंह कुर्मी ने कहा कि सागर जिले के सभी प्रभावित किसान अपनी एक इंच भूमि नहीं देंगे उसके लिए आरपार की लड़ाई लड़ने के लिये हम तैयार हैं । मंडी उपाध्यक्ष माधोसिंह पटेल ने कहा कि मैं किसानों का प्रतिनिधि हूँ तथा मेरी खुद पुरखों की जमीन परियोजना में डुबाई जा रही है उसे मैं किसी भी कीमत पर जाने नहीं दूंगा।
पार्षद मुन्ना दाना ने कहा कि 15 साल से में पार्षद हूँ किसानों की जमीन बचाने के लिये संघर्ष करूँगा भले ही मुझे कितने भी मुकदमें झेलनें पड़ें । मंडी सदस्य निर्भय सिंह ने कहा कि परियोजना किसानों को पानी देने के लिए नहीं कमीशन में मोटी रकम लेकर बीना रिफायनरी को पानी देने के लिए बनाई जा रही है ।
किसान रमेश भार्गव ने कहा की हम अपनी जमीन आसानी से नहीं डूबने देंगे हर कीमत पर बचायेंगे । किसान जागृति संगठन के नेता इरफ़ान जाफरी ने अपने संगठन की ओर से आन्दोलन का समर्थन देने की घोषणा की ।सभा की अध्यक्षता पार्षद मुन्ना अली दाना ने की। किसानों को कैलाश गुप्ता, श्रीराम सेन, रेहान भाई, आदि ने भी संवोधित किया.

 

LEAVE A REPLY