जुलाई में चलाया गया कुष्ठ रोगी खोज अभियान, मिले 11 मरीज

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ललितपुर. यहां राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत पहली बार कुष्ठ रोगी खोज अभियान 16 से 29 जुलाई तक चलाया गया। कुष्ठ रोगियों को खोजने के लिए जनपद में 1356 टीमों ने घर-घर जाकर कुष्ठ रोगियों की पहचान करने में सफल रहे। इस दौरान जनपद में 11 नए कुष्ठ रोगी पाये गए, जिसमें 2 रोगी गंभीर रूप से ग्रसित पाये गए। इन दो रोगियों की विशेष रूप से जांच के बाद उपचार पर रखा जाएगा।

डॉ० आरके सोनी, जिला कुष्ठ रोग अधिकारी ने बताया, जनपद में दो ऐसे रोगी मिले है जिनकी नसों में बैक्टीरिया पहुँच चुका है और यदि उनको तुरंत ही जांच व उपचार न दिया गया तो यह और अधिक फैल सकता है। उन्होने बताया कि कुष्ठ रोग का बैक्टीरिया टीबी के बैक्टीरिया की प्रजाति का होता है, यह किसी संक्रमित व्यक्ति के छींकने से फैलता है। एक संक्रमित व्यक्ति के छींकने से एक बार में 1000 से ज्यादा बैक्टीरिया निकलते है। इस दौरान यदि सामने वाले व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, तो ऐसे व्यक्ति पर यह बहुत जल्दी हावी हो जाता है। यह बैक्टीरिया सीधे जाकर नसों और मांसपेशियों में असर करता है।

उन्होने बताया कि दो तरह के मरीजों के लिए दो तरह की दवाएं दी जाती है। एक ऐसे रोगी जो असंक्रामक रोगी के रूप में होते है जिनसे कुष्ठ रोग फैलने का डर नहीं होता है। उनके लिए छः माह तक पौसी बैसिलरी की दवा दी जाती है। वहीं दूसरे ऐसे रोगी जो संक्रामक रोगी के रूप से में होते है, उनके लिए 12 माह तक मल्टी बैसिलरी की दवा दी जाती है।

उन्होने बताया कि अप्रैल 2016 से मार्च 2017 तक 81 कुष्ठ रोगी थे। वहीं अप्रैल 2017 से मार्च 2018 तक 81 रोगी थे। कुल मिलाकर पिछले दो वर्षों में 162 रोगी पाये गए, जिनमें से 89 कुष्ठ रोगियों को ठीक किया जा चुका है। वहीं 73 को इलाज दिया जा रहा है।

जनपद में करीब 13 लाख 56 हजार की आबादी के लिए जिले में लगभग 1356 टीमें गठित की गयी थी और उनके पर्यवेक्षण के लिए करीब 270 सुपरवाइज़र निर्धारित किए गए थे। हर एक टीम को एक फॉर्मेट प्रदान किया गया था, जिसके तहत टीम ने कुष्ठ के प्रारम्भिक लक्षण के आधार पर जांच एवं परीक्षण किया। जांच के उपरांत जिस व्यक्ति में कुष्ठ रोग की पुष्टि की गयी, उनको जल्द से जल्द स्वास्थ्य केन्द्रो द्वारा उपचार दिया जायेगा जिससे कुष्ठ रोग पूर्ण रूप से समाप्त हो सके।

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