लोगों में फैमिली प्लानिंग को लेकर बढ़ रही जागरूकता, कॉपरटी और गर्भ निरोधक गोलियों आ रहीं चलन में

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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे 2015-16 के अनुसार झाँसी में लगभग 46 फीसदी लोग ही परिवार नियोजन के तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, जबकि 54 फीसदी लोग परिवार नियोजन के किसी भी तरीके का उपयोग नहीं करते हैं। परिवार नियोजन के लिए नसबंदी की बात करें तो यह ज़िम्मेदारी ज्यादातर महिलाओं ने ही उठा रखी हैं, 18 प्रतिशत महिलाओं की नसबंदी हुई हैं। वही पुरुष नसबंदी की स्थिति मस्थिरता पखवाड़ा विशेष
पिछले तीन सालों में परिवार नियोजन के लिए कॉपर टी और गर्भ निरोधक गोलियों ज्यादा रही चलन में
झाँसी – 29 जुलाई 2018
जिले में परिवार नियोजन एवं जनसंख्या संयोजित के मामले में पिछले तीन सालों में स्थायी और अस्थायी
की एक अस्थायी विधि हैं। यदि एक महिला ओसीपी की प्रतिदिन एक गोली लेती हैं, तो विधियों में लोगों द्वारा गर्भनिरोधक गोलियां एवं कॉपर टी को सबसे ज्यादा अपनाया गया हैं। वही पुरुष नसबंदी का प्रतिशत सबसे कम रहा। अगर कॉपर टी की बात करे तो पिछले तीन सालों में 62469 महिलाओं ने कॉपर टी लगवाई। वही 199533 महिलाओं ने गर्भ जनसंख्या निरोधक गोलियों को अपनाया हैं।
गर्भनिरोधक गोलियां (ओसीपी) एवं कॉपर टी (आईयूसीडी) हैं क्या?
गर्भनिरोधक गोलियां परिवार नियोजन वह अपनी गर्भावस्था को रोक सकती हैं। यह गोलियां माहवारी के रक्तस्राव के शुरू होने के प्रथम पाँच दिनों में से किसी भी एक दिन से एएनएम व डॉक्टर की सलाह से शुरू कर सकते हैं। इन गोलियों को माला एन या माला डी कहते हैं।
कॉपर टी एक छोटा T आकार का लचीला साधन हैं, जिसे गर्भाशय के अंदर लगाया जाता हैं, अधिकतर लोग इसे कॉपर टी के रूप में जानते हैं। आईयूसीडी प्रायः वीर्य को अंडों तक पहुंचने से रोकता हैं। इस प्रकार अंडे निशेचित नहीं हो पाते। कॉपर टी महिलाओं के लिए एक बहुत असरदार गर्भनिरोधक साधन हैं। इसको माहवारी के आरंभ होने के सात दिन के अंदर, बच्चा पैदा होने पर 6 सप्ताह बाद केवल प्रशिक्षित नर्स व डॉक्टर से ही लगवाना चाहिए।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबन्धक, ऋषिराज सिंह बताते हैं कि जिले में जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा स्थायी एवं अस्थायी विभिन्न विधियाँ जैसे- कंडोम, कॉपर टी, पीपीआईयूसीडी, माला एन, आपातकालीन गर्भनिरोधक, अंतरा, छाया, महिला एवं पुरुष नसबंदी चलायी जा रही है, जिससे जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण रखा जा सके, और मातृ मृत्यु एवं शिशु मृत्यु मेँ कमी लायी जा सके। इसी को ध्यान मेँ रखते स्वास्थ्य विभाग द्वारा शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों मेँ लोगों को परिवार नियोजन के विधियों के बारे मेँ जागरूक किया जा रहा हैं।
जिला कार्यक्रम प्रबन्धक के अनुसार जनपद में प्रयोग की जा रही विधियाँ का आंकड़ा निम्न प्रकार हैं-
क्रम०
सं० वर्ष 2015-16 परिवार नियोजन विधियों में लोगों द्वारा उपयोग की गयी विधियों की संख्या वर्ष 2016-17 परिवार नियोजन विधियों में लोगों द्वारा उपयोग की गयी विधियों की संख्या वर्ष 2017-18 परिवार नियोजन विधियों में लोगों द्वारा उपयोग की गयी विधियों की संख्या
1॰ कॉपर- टी 21084 कॉपर- टी 22591 कॉपर- टी 18794
2. पीपीआईयूसीडी 3848 पीपीआईयूसीडी 5254 पीपीआईयूसीडी 5933
3. गर्भनिरोधक
गोली (माला एन) 63904 गर्भनिरोधक
गोली (माला एन) 59862 गर्भनिरोधक
गोली (माला एन) 75767
5. कंडोम 783112 कंडोम 693817 कंडोम 799789
6. अंतरा — अंतरा —— अंतरा (फरवरी 2018 से अभी तक) 128
7. छाया — छाया —— छाया (फरवरी 2018 से अभी तक) 224
8. महिला नसबंदी 6790 महिला नसबंदी 8407 महिला नसबंदी 8120
9. पुरुष नसबंदी 30 पुरुष नसबंदी 105 पुरुष नसबंदी 76

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे 2015-16 के अनुसार झाँसी में लगभग 46 फीसदी लोग ही परिवार नियोजन के तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, जबकि 54 फीसदी लोग परिवार नियोजन के किसी भी तरीके का उपयोग नहीं करते हैं। परिवार नियोजन के लिए नसबंदी की बात करें तो यह ज़िम्मेदारी ज्यादातर महिलाओं ने ही उठा रखी हैं, 18 प्रतिशत महिलाओं की नसबंदी हुई हैं। वही पुरुष नसबंदी की स्थिति महिला की अपेक्षा न के बराबर हैं।

परिवार नियोजन न सिर्फ जनसंख्या को स्थिर बनाने के लिए ज़रूरी हैं बल्कि इसको महिला के स्वास्थ्य से भी जोड़ा जाना चाहिए।
वर्ष 2001 में जिले की कुल जनसंख्या सत्तर लाख चवालीस हज़ार नौ सौ इकत्तीस (1744931) थी, जो वर्ष 2011 में बढ़कर उन्नीस लाख अठ्ठानवे हज़ार छ सौ तीन (1998603) हो गयी। जनसंख्या में निरंतर व्रद्धि को संयोजित करना स्वस्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय बन गया हैं।
परिवार को नियोजित करने के लिए अनेक प्रोग्राम चलाये जा रहे हैं। अब तो हौसला साझेदारी के तहत परिवार नियोजन के लिए निजी अस्पतालों के साथ भी सहभागिता की जा रही हैं जिससे कि लोगों को परिवार नियोजन की विधियों की उपलब्धता निजी अस्पतालों में भी मिल सके। मिनी लेप, नसबंदी, अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने की विधि (आईयूसीडी) जैसी सेवाएँ इन निजी अस्पतालों में निःशुल्क दी जा रही है।
हिला की अपेक्षा न के बराबर हैं।

परिवार नियोजन न सिर्फ जनसंख्या को स्थिर बनाने के लिए ज़रूरी हैं बल्कि इसको महिला के स्वास्थ्य से भी जोड़ा जाना चाहिए।
वर्ष 2001 में जिले की कुल जनसंख्या सत्तर लाख चवालीस हज़ार नौ सौ इकत्तीस (1744931) थी, जो वर्ष 2011 में बढ़कर उन्नीस लाख अठ्ठानवे हज़ार छ सौ तीन (1998603) हो गयी। जनसंख्या में निरंतर व्रद्धि को संयोजित करना स्वस्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय बन गया हैं।
परिवार को नियोजित करने के लिए अनेक प्रोग्राम चलाये जा रहे हैं। अब तो हौसला साझेदारी के तहत परिवार नियोजन के लिए निजी अस्पतालों के साथ भी सहभागिता की जा रही हैं जिससे कि लोगों को परिवार नियोजन की विधियों की उपलब्धता निजी अस्पतालों में भी मिल सके। मिनी लेप, नसबंदी, अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने की विधि (आईयूसीडी) जैसी सेवाएँ इन निजी अस्पतालों में निःशुल्क दी जा रही है।

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