चौथे टेस्ट पर दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला आज

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नई दिल्ली। दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) ने भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच चौथे टेस्ट मैच की मेजबानी के संबंध में मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। डीडीसीए ने न्यायालय से दक्षिण दिल्ली नगर निगम को प्रोविजनल ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट (पीओसी) देने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। न्यायाधीश बी. डी. अहमद और न्यायाधीश संजीव सचदेवा की खंडपीठ अब इस मामले पर आज सुनवाई करेगी।

राष्ट्रीय राजधानी के फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में तीन से सात दिसंबर के बीच चौथा टेस्ट होने वाला है, जिसके लिए डीडीसीए ने एक से 10 दिसंबर के लिए पीओसी सर्टिफिकेट दिए जाने की मांग की है।पूर्व खिलाड़ी कीर्ति आजाद ने अदालत को बताया कि डीडीसीए को यह मैच फिरोटशाह कोटला स्टेडियम में करवाए जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और डीडीसीए में वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया और उसकी जांच करने की मांग भी की।

गौरतलब है कि एसडीएमसी ने सोमवार को डीडीसीए के पीओसी सर्टिफिकेट दिए जाने के आवेदन को खारिज कर दिया था। दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) की मुश्किलें उस समय और बढ़ गई जब दिल्ली सरकार द्वारा नियुक्त जांच पैनल ने कथित अनियमितताओं के लिए बीसीसीआई द्वारा डीडीसीए को निलंबित करने की सिफारिश की और कहा कि राजधानी में खेल के संचालन के लिए इसकी जगह पेशेवर क्रिकेटरों की अंतरिम समिति नियुक्त की जानी चाहिए। यह रिपोर्ट तब सौंपी गई है जब तीन दिसंबर से भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच चौथे और अंतिम टेस्ट क्रिकेट मैच के आयोजन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और डीडीसीए ने बीसीसीआई से समयसीमा बढ़ाने की मांग की है।

बीसीसाआई ने मामला अदालत में होने के कारण इस मामले को आज तक के लिए टाल दिया है। समिति ने कहा कि सरकार को जांच आयोग अधिनियम के तहत क्रिकेट प्रशासकों के कामकाज की जांच के लिए जांच आयोग नियुक्त करना चाहिए। इसमें डीडीसीए के कथित गलत कार्यों की हाल में विभिन्न जांच पैनलों की जांच का जिक्र भी किया गया है। इनमें गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) की रिपोर्ट भी शामिल है।

डीडीसीए को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सरकार द्वारा वित्त पोषित मानते हुए समिति ने कहा कि इसे सूचना का अधिकार कानून के अंतर्गत लाया जाना चाहिए। इसमें कहा गया है कि डीडीसीए के पदाधिकारियों को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम 1988 के अधीन आते हैं। राज्य सरकार ने रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी है। इसमें कहा गया है कि बीसीसीआई अब हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठे रह सकता और डीडीसीए को बीसीसीआई के नियमों के अनुसार निलंबित किया जाना चाहिए। दिल्ली में क्रिकेट प्रशासन को चलाने के लिए क्रिकेटरों की पेशेवर संस्था की अंतरिम नियुक्ति की जानी चाहिए।

समिति ने शनिवार को नागपुर में बीसीसीआई अध्यक्ष शशांक मनोहर से भी मुलाकात की जिसमें दिल्ली सरकार के सहयोग से पेशेवरों के समूह के जरिए चौथे टेस्ट मैच के आयोजन के विकल्प पर भी चर्चा हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि मनोहर इसके समर्थन में नहीं थे क्योंकि उनका मानना था कि अन्य राज्यों से भी इस तरह की मांग उठ सकती है। डीडीसीए के खिलाफ बड़ी संख्या में आरोपों को देखते हुए जांच पैनल ने सिफारिश की कि दिल्ली सरकार को सुप्रीम कोर्ट से संपर्क करना चाहिए और क्रिकेट प्रशासन को व्यवस्थित करने के संबंध में न्यायमूर्ति लोढ़ा समिति की सलाह के अनुसार चलने का आग्रह करना चाहिए।

आईपीएल सट्टेबाजी प्रकरण की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट से नियुक्त आर एम लोढ़ा समिति अभी बीसीसीआई की कार्यशैली में सुधार के लिए सुझाव तैयार करने पर काम कर रही है। सतर्कता विभाग में प्रधान सचिव चेतन संघी की अध्यक्षता वाली समिति ने एक अन्य महत्वपूर्ण सिफारिश में कहा कि दिल्ली में खेलों में धोखाधड़ी रोकने के लिए दिल्ली सरकार को क्रिकेट सहित सभी विभिन्न खेलों के लिए कानून बनाना चाहिए और खिलाड़ियों के चयन और विभिन्न संस्थाओं के चुनावों में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।

इसमें कहा गया है कि डीडीसीए के कामकाज मुख्य रूप से क्रिकेटरों को देखने चाहिए। समिति ने डीडीसीए में कथित अनियमितताओं में निष्क्रियता दिखाने के लिये बीसीसीआई की भी कड़ी आलोचना की। उसने यहां तक कि 2000 में मैच फिक्सिंग प्रकरण में सीबीआई के अवलोकन का भी हवाला दिया। सरकार ने कहा कि चौथे टेस्ट मैच की मेजबानी और क्रिकेट प्रशासन की कार्यप्रणाली में की जांच में कोई संबंध नहीं है। आबकारी विभाग के अनुसार डीडीसीए को मनोरंजन कर के रूप में उसे 24 करोड़ रूपए देने हैं। फिरोजशाह कोटला मैदान पर टेस्ट मैच की मेजबानी के लिए आबकारी विभाग की स्वीकृति की भी जरूरत है।

सरकार ने बयान में कहा कि दिल्ली सरकार स्पष्ट करना चाहती है कि भारत-दक्षिण अफ्रीका टेस्ट मैच से संबंधित वर्तमान मसला किसी भी तरह से इस जांच रिपोर्ट से नहीं जुड़ा है और जांच समिति के सामने भी यह मसला नहीं था जिसने कि अब अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। माना जा रहा है कि 2012 से मनोरंजन कर का भुगतान नहीं किया गया है और डीडीसीए को कर के भुगतान से छूट मिलने की उम्मीद है।

बीसीसीआई ने हालांकि डीडीसीए के जरूरी स्वीकृति हासिल करने में विफल रहने की दशा में पुणे को विकल्प के तौर पर तैयार रखा है। डीडीसीए उपाध्यक्ष और बोर्ड के अन्य सदस्य जांच समिति के समक्ष उपस्थित हुए थे और उन्होंने विभिन्न मसलों पर अपना पक्ष रखा था। हाल में पूर्व भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी और मदन लाल ने केजरीवाल से मुलाकात करके डीडीसीए को साफ सुथरा बनाने के लिए हस्तक्षेप करने को कहा था। पूर्व भारतीय बल्लेबाज गौतम गंभीर ने भी इस मसले पर पिछले सप्ताह दिल्ली के मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी।

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