बुन्देलखण्ड मेडिकल कालेज में तांत्रिक ने घसीट-घसीट कर किया महिला के उतारे भूत, तमाशा देखते रहे चिकित्सक

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सागर। आठ माह की गर्भवती उस महिला को बुंदेलखंड मेडिकल कालेज सागर में इलाज कराने के लिए लाया गया था। महिला चीख रही थी और वहां के डाक्टर कुछ समझ ही नहीं पा रहे थे। काफी देर बाद जब वहां के चिकित्सक महिला को दवा देकर आराम नहीं पहुंचा सके तो उसके परिजनों ने तांत्रिक को अस्पताल में ही बुला लिया। किसी ने कहा कि महिला को भूत लगा है। फिर क्या था तांत्रिक ने अस्पताल में ही महिला को मारते-पीटते ही भूत उतारने का उपचार शुरू कर दिया गया और मेडिकल प्रशासन तमाशबीन बना रहा। गर्भवती महिला को तीन घंटे घसीट-घसीट कर पीटा गया, जिसका किसी ने विरोध भी नहीं किया।
जानकारी के मुताबिक मेडिसिन विभाग के बाहर गलियारे में दोपहर करीब 1 बजे इस घटना को देखने के लिए लोगों का हुजूम लगा था। कंबल बिछाकर तांत्रिक बैठा था। सामने जमीन पर नीमोन पड़वार गांव की 25 वर्षीय गर्भवती अर्चना पति भानू चढ़ार बैठी थी। तांत्रिक ने पूजा-पाठ करकरने के कुछ देर बाद  महिला को बेरहमी से थप्पड़ मारना शुरू कर दिए। इससे महिला जमीन पर गिर गई। तांत्रिक उसके बाल पकड़कर घसीटता और मारपीट करता रहा। मेडिसिन विभाग में मौजूद स्टाफ ने भी यह तमाशा देखा। लेकिन विरोध किसी ने नहीं किया। उन्होंने सिर्फ यह कहा कि जो करना है बाहर ले जाकर करो।
विरोध किया तो भूत लगाने की धमकी मेडिसिन विभाग के सामने लगी भीड़ देखकर एआरटी सेंटर के परामर्शदाता अनुपम बोहरे भी यहां पहुंचे। उन्होंने जब तंत्र क्रिया होते देखी तो विरोध किया और तांत्रिक को अस्पताल से भगाने का प्रयास किया। इस पर तांत्रिक भड़क गया और विरोध करने वालों को ही भूत लगाने की धमकी दे दी।
तांत्रिक ने कहा मैने मार-मार कर भगा दिए चार भूत
 ग्रामीण भानू की गर्भवती पत्नी अर्चना 10 दिन से बीमार थी। पीएनसी वार्ड में भर्ती थी।
कुछ भी बड़बड़ाती और कहती मेरे बच्चे को कोई ले जा रहा है। डॉक्टर उसकी तकलीफ नहीं समझ पा रहे थे। शनिवार को भानू ने बंडा ब्लॉक के राक्सी गांव से तांत्रिक को बुलाया। भानू का दावा है कि तांत्रिक ने अर्चना पर छाए 4 भूतों को भगाया है। तीन भूत तो उसे अस्पताल में ही लग गए थे। चौथे उसके बड़े भाई मुकेश थे, जिनकी कुछ समय पहले मौत हो गई है। अब अर्चना को आराम है।
मान्यताओं के हिसाब से ऐसा करते हैं
बीएमसी सागर के डीन डाक्टर जेएन सोनी ने बताया कि तरह की घटना होने के संबंध में पता चला है। मैंने जानकारी ली है, लेकिन अभी कुछ पता नहीं चल पा रहा है।
लोग अपनी भावनाओं और मान्यताओं के हिसाब से ऐसा करते हैं। कोई उन्हें कैसे रोक सकता है। अस्पताल में तो ऐसा नहीं होना चाहिए।

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