बुन्देलखण्ड को भी एक अदद सलमान चाहिए …!

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बजरंगी भाईजान को सलाम, 27 दिसम्बर 1965 को जन्मे सलमान खान जीवन की अर्धशतकीय दहलीज पर हैं। आज उनका जन्मदिन उनके चाहने वालों के लिए बेहद खास है। हिन्दुस्तान में सलमान खान के साथ कई विवाद भले ही चलते रहे हों, लेकिन उनकी पहचान उनके नाम के साथ एक अच्छे इंसान के रूप में भी है। सलमान को गरीबों का मसीहा भी कहा जाए तो ये भी कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। वह जो कमाते हैं उसका 40 फीसदी गरीबों के लिए होता है। 60 से अधिक ग्रामों को गोद लिया है भाईजान ने। उन ग्रामों में स्कूल, कॉलेज, घर, रोजगार और बीमार लोगों के इलाज पर सलमान अपने पसीने की कमाई को दिल खोलकर दान करते हैं। सौ लोगों के दिल का आपरेशन और न जाने कितने कैंसर पीडि़तों की मदद कर चुके ‘बजरंगी’ पर हमें गर्व है। सच मानें तो जो काम सरकारें नहीं कर सकीं वह सलमान ने कर दिखाया है। वह अभिनेता हैं, पर्दे पर जैसा किरदार उनका नजर आता है असल जिंदगी में उससे कहीं अधिक महानता उनके भीतर दिखती है। जरा सोचिए, ऐसे कितने लोग होंगे जो अपनी कमाई का 40 फीसद हिस्सा गरीबों में बांट देते हों। कितने लोग गरीब लड़कियों के हाथ पीले कराने के लिए एक पिता और भाई की तरह जिम्मेदारी निभाते होंगे। धनवान तो बहुत देखे, लेकिन मदद करने का हौसला और इंसान होने का फर्ज सलमान सरीखा कम ही दिखता। बुन्देलखण्ड क्षेत्र भी इस समय भयानक सूखे के दौर से गुजर रहा है। आकाल के हालात हैं। किसान खुदकुशी कर रहे हैं। घरों में खाने को नहीं है। झांसी में जन महोत्सव के जश्र की धूम के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में अन्नदाता दाने दाने को मोहताज हो गया है। यहां भी कोई सलमान सरीखी शख्सियत होती। बुन्देलखण्ड बदहाल है, इसे भी एक अदद सलमान चाहिए…! bundelkhandkhabar.com

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