बुन्देलखण्ड की नेत्रहीन युवती ने भगवान कृष्ण से रचाया विवाह, पूरे गांव ने दी बेटी को विदाई

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टीकमगढ़। करीब 400 वर्ष पूर्व भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में सराबोर होकर उनकी परम भक्त मीरा ने उन्हे अपना पति मानकर मूर्ति संग सात फेरे लिए थे और अब भक्त मीरा के पदचिन्हों पर चलते हुए एक और भक्त ने भगवान श्री कृष्ण को अपना पति मान लिया है। ”मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरों ना कोई, जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोईÓÓ चौपाई आज रविवार को बुंदेलखंड की धरती पर चरितार्थ हुई और इसके गवाह ग्राम दिगौड़ा में निवासरत समस्त गांववासी बन गए।
बचपन से ही नेत्रहीन युवती शालिनी भगवान श्री कृष्ण के प्रेम में इस प्रकार दीवानी हुई कि उसने उन्हे ही अपना पति मान लिया। जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम दिगौड़ा निवासी करीब 22 वर्षीय युवती शालिनी विदुआ ने जब यह फैसला परिजनों को सुनाया तो वह दंग रह गए। शालिनी को समझाने-बुझाने का सिलसिला भी चला लेकिन अंत में परिजनों को शालिनी का फैसला स्वीकार करना ही पड़ा। शालिनी की भगवान श्री कृष्ण से शादी की तैयारियां शुरु हुई और विवाह के पूर्व की सभी रस्में निभाई जाकर आज रविवार को पूरे विधि-विधान के साथ शालिनी का विवाह श्री कृष्ण के साथ संपन्न हो गया।
गोपाल मंदिर से गाजे-बाजे के साथ निकली बारात में गांववासी शामिल हुए और फिर शालिनी के घर जाकर वैवाहिक रस्में निभाई गई। महिलाओं ने मंगल गीत गाए और जयमाला का कार्यक्रम किया गया। दुल्हन बनी शालिनी ने भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति को माला पहनाई तथा पुजारी जी ने भगवान की मूर्ति से शालिनी को माला पहनवाकर शादी को संपन्न कराया। शादी के दौरान हजारों लोग उपस्थित रहे।
इस दौरान धर्मावलंबियों के मुंह से सुना गया कि बीते 400 वर्ष पूर्व मीरा ने भगवान श्री कृष्ण को मानसिक तौर पर अपना पति माना था और आज शालिनी ने भगवान से मानसिक और शारीरिक रुप से शादी कर इतिहास बना दिया है। गौरतलब है कि शालिनी बचपन से ही आंखों से दिव्यांग है तथा भगवान श्री कृष्ण की परम भक्त रही है। शालिनी का कहना है उसने अपने अंतर्मन की आवाज पर भगवान श्री कृष्ण से शादी रचाकर उन्हे अपना पति मान लिया है। यह अनूठी शादी जिले सहित आसपास के इलाकों में भी चर्चा और कोतूहल का विषय बनी हुई है।

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