तालाबों के संरक्षण को शुरू भू विसर्जन की परम्परा

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झांसी। देवी प्रतिमाओं के जल विसर्जन के कारण होने वाले पर्यावरण को नुकसान को दृष्टिगत रखते हुए कुछ लोगों ने नई परम्परा शुरू कर दी है। इसके तहत देवी प्रतिमाओं को नदी या तालाबों में विसर्जित करने के बजाय उनका भू विसर्जन कराया गया है। इस नई परम्परा को सभी ने सराहा है और बड़ी संख्या में महिलाएं भू-विसर्जन के दौरान जल अर्पित करने को उमड़ पड़ीं।
बुन्देलखण्ड में जल संकट शुरू से ही रहा है। यहां के कई तालाब और नदियां पानी को तरसते हैं। इसके साथ ही तालाबों व नदियों में होने वाले प्रदूषण से आम जनमानस को भी बड़ा नुकसान झेलना पड़ता है। यहां नवरात्रि पर्व के बाद होने वाली प्रतिमा विसर्जन के बाद तालाबों और नदियों की स्थितियां काफी बदतर हो जातीं हैं। झांसी जिले में करीब चार हजार से अधिक प्रतिमाओं का विसर्जन स्थानीय तालाब व नदियों में होने से वहां कई दिनों तक स्नान भी नहीं किया जा सकता। यह पानी पीने योग्य भी नहीं बचता। जल प्रदूषण को ही देखते हुए झांसी जिले की कुछ दुर्गा पूजा समितियों ने प्रतिमाओं के भू-विसर्जन का फैसला किया और इसे साकार भी कर दिखाया। पुरानी परम्पराओं को तोडक़र सीपरी बाजार स्थिति राम मन्दिर दुर्गा प्रतिमा समिति ने शुक्रवार को रात्रि के समय वहां पर स्थापित की गईं नौ देवियों की प्रतिमाओं को मन्दिर परिसर में ही भू विसर्जित किया। इसके लिए करीब 20 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया। प्रतिमा को पूरे क्षेत्र में भ्रमण के बाद विसर्जन के लिए लाया गया। यहां बड़ी संख्या में पहुंचीं महिलाओं ने कलश में जल भरकर गड्ढे में रखी गई प्रतिमाओं पर श्रद्धा के साथ जल अर्पण कर विदाई दी, जिसके बाद प्रतिमाओं को मिट्टी से ढक दिया गया। इसके साथ ही कालीबाड़ी मन्दिर परिसर में रखी दुर्गा प्रतिमा को भी भू-विसर्जित किया गया। इस दौरान बंगाली समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में वहां पहुंचकर मां के अन्तिम दर्शन किए।
प्रतिमा विसर्जन  से लक्ष्मीताल हुआ बदहाल
झांसी। दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन ने झांसी के प्राचीन लक्ष्मी तालाब को बदहाल स्थिति में ला दिया है। लक्ष्मी तालाब के पानी में दुर्गा प्रतिमाओं के अपशेष उतरा रहे हैं। पानी पूरी तरह से प्रदूषित हो चुका है। यहां पानी इतना खराब हो चुका है कि यहां स्नान भी नहीं किया जा सकता है। गौरतलब है कि हाल ही में विभिन्न संगठनों द्वारा लक्ष्मीतालाब की सफाई को मुहिम चलाई गई थी, लेकिन प्रतिमाओं के विसर्जन से तालाब का जल पूरी तरह से प्रदूषित हो चुका है।

 

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